एंटी रोमियो स्क्वॉयड की कहानियां - 1

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खेत थे.. झुरमुट था.. बगीचा था.. पगडंडी थी.. हर शाम खेतिहर मजदूर इसी पगडंडी को पकड़ घरों को लौटते। चलता फिरता रास्ता था.. लेकिन इतना भी नहीं कि दिल्ली-पटना रूट हो। 'एंटी रोमियो दस्ता अक्सर इस पगडंडी पर खड़ा मिलता। 'लायक' इस दस्ते के कैप्टन थे और उनकी नजर सोहना बो पर थी। 

सोहना बो एक बिंदास महिला थी, उसे किसी की परवाह नहीं थी और यही चीज उसे खूबसूरत बनाती। मेहनती लोग बहुत खूबसूरत होते हैं। लायक हर शाम फरसा लेकर अपने खेत में पहुंच जाते.. सोहना बो के शिकार में। उस दिन गोधूलि बेला का समय था। सोहना बो अपनी सहेलियों के साथ घर लौट रही थी। उसके दुपट्टे में दाना बंधा था और वो भर मुट्ठा फांक रही थी। हंस रही थी, मगन थी घर लौटने की जल्दी में। लायक ने देखा और कुटीली मुस्कान भर के बोले.. एक बार और फांक के दिखाओ.. सोहना बो को लगा मजाक कर रहे हैं। 

उसने भर मुट्ठा दाना मुंह में डाला.. लायक ने झपट्टा मारकर उसके मुंह को कसके हाथ से दबा लिया। सोहना बो के मुंह में दाना भरा था.. आवाज निकल नहीं पा रही थी और फिर एंटी रोमियो दस्ता गोधूलि बेला में झुरमुट से बाहर आ गया.. वो 5-7 थे और फिर.. जो हुआ वो भयानक था.. सोहना बो गिरते पड़ते लड़खड़ाते बेहोशी की हालत में अपने घर पहुंची... चांद का चेहरा और काला पड़ गया था।

Comments

  1. बढ़िया है. एक सवाल लायक का संबंध योगी से तो नहीं................

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    1. नहीं.. लायक.. लायक ही था अपनी तरह का।

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